दसवें भाव का स्वामी नौवें भाव में

दसवें भाव का स्वामी नौवें भाव में: कर्म, पेशा और प्रतिष्ठा की बातें भाग्य, धर्म और गुरु के क्षेत्र से जुड़ जाती हैं।

आपके लिए इसका क्या मतलब है

दसवें भाव का स्वामी जब नौवें भाव में बैठता है, तो कर्म, पेशा और प्रतिष्ठा के विषय भाग्य, धर्म और गुरु के क्षेत्र में काम करते हैं। कौन-सा ग्रह यह स्वामी है, वह कितना बलवान है और कौन-सी दशा चल रही है, इससे असर बदलता है। यह कुंडली पढ़ने की शुरुआत है, कोई फ़ैसला नहीं।

भाव-स्वामी का अर्थ

हर भाव का एक स्वामी ग्रह होता है। वह ग्रह जिस भाव में बैठता है, उस भाव के विषयों में पहले भाव के विषय जुड़ जाते हैं। इसी से पता चलता है कि जीवन के कौन-से क्षेत्र आपस में बँधे हैं।

अपनी कुंडली में कैसे देखें

पहले अपना लग्न जानिए, फिर देखिए कि वह भाव किस राशि में पड़ता है और उसका स्वामी कहाँ बैठा है। आपकी जन्म कुंडली यह एक मिनट में दिखा देती है।

एक छोटा संकल्प

इस जोड़ी में से एक विषय चुनिए जिसे आप इस महीने थोड़ा और ध्यान देना चाहते हैं।

मेरी कुंडली में देखिए

यह सांस्कृतिक जानकारी है, भविष्यवाणी नहीं।

पूरी विस्तृत जानकारी अभी अंग्रेज़ी में है। पूरा अंग्रेज़ी लेख पढ़ें.

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