भाव-स्वामी का अर्थ
हर भाव का एक स्वामी ग्रह होता है। वह ग्रह जिस भाव में बैठता है, उस भाव के विषयों में पहले भाव के विषय जुड़ जाते हैं। इसी से पता चलता है कि जीवन के कौन-से क्षेत्र आपस में बँधे हैं।
सातवें भाव का स्वामी आठवें भाव में: विवाह, साझेदारी और समझौते की बातें परिवर्तन, गहराई और अचानक मोड़ के क्षेत्र से जुड़ जाती हैं।
सातवें भाव का स्वामी जब आठवें भाव में बैठता है, तो विवाह, साझेदारी और समझौते के विषय परिवर्तन, गहराई और अचानक मोड़ के क्षेत्र में काम करते हैं। कौन-सा ग्रह यह स्वामी है, वह कितना बलवान है और कौन-सी दशा चल रही है, इससे असर बदलता है। यह कुंडली पढ़ने की शुरुआत है, कोई फ़ैसला नहीं।
हर भाव का एक स्वामी ग्रह होता है। वह ग्रह जिस भाव में बैठता है, उस भाव के विषयों में पहले भाव के विषय जुड़ जाते हैं। इसी से पता चलता है कि जीवन के कौन-से क्षेत्र आपस में बँधे हैं।
पहले अपना लग्न जानिए, फिर देखिए कि वह भाव किस राशि में पड़ता है और उसका स्वामी कहाँ बैठा है। आपकी जन्म कुंडली यह एक मिनट में दिखा देती है।
इस जोड़ी में से एक विषय चुनिए जिसे आप इस महीने थोड़ा और ध्यान देना चाहते हैं।
मेरी कुंडली में देखिएयह सांस्कृतिक जानकारी है, भविष्यवाणी नहीं।
पूरी विस्तृत जानकारी अभी अंग्रेज़ी में है। पूरा अंग्रेज़ी लेख पढ़ें.